मंगलवार
अरविन्द श्रीवास्तव प्रस्तुत करते हैं -
मधेपुरा का संक्षिप्त इतिहास और
साहित्यिक गतिविधिओं का लेखा जोखा -
मधेपुरा का संक्षिप्त इतिहास और
साहित्यिक गतिविधिओं का लेखा जोखा -
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मधेपुरा का इतिहास,साहित्य और संस्कृति को जानने का एक साझा मंच
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हमें बनना था सभी के लिये और शामिल होना था सभी मे। हमें बातें करनी थी पत्तियों से और तितलियों के लिये इकट्टा करना था ढेर सारा पराग । हमें बचानी थी नारियल के लिये पानी और चूल्हे के लिये आग । हमें रहना था अनार में दाने की तरह, मेंहदी में रंग, और गन्ने में रस बनकर । हमें यादों में बसना था लोगों के मटरगश्ती भरे दिनों सा और दौड़ना था लहू बनकर शवों की नब्ज में । लेकिन अफ़सोस कि हम ऐसा कुछ नहीं कर पाये, जैसा करना था हमें। शिक्षा - एम0ए0, पी-एच0 डी0, जन्म एव कर्म स्थल - मधेपुरा। पत्राचार पता - कला कुटीर, अशेष मार्ग, मधेपुरा, बिहार । मोबाइल - 094310 80862